शीर्षक: राजनीति की बिसात और नैतिकता के दोहरे मापदंड: कौन है असली राक्षस?
लेखक: अजय नायक ‘वशिष्ठ’
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| Pic By AI Gemini |
"बात तो सही कहा है। ईरान युद्ध में, अगर ट्रंप और नेतन्याहू राक्षस हैं, तो इस युद्ध में जो तीसरा नाम सऊदी अरब का सामने आ रहा है, वो क्या हैं? जरा इस पर भी रोशनी पड़नी चाहिए।
अच्छा इसे छोड़ो, बताओ, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में कौन राक्षस है?
अच्छा इसे भी छोड़ो, बताओ, यूक्रेन और रूस में कौन राक्षस है?
बात अगर मुँह से निकली है, तो और सब पर भी तो निकलनी चाहिए; या जहाँ तक खुद का विषय है, वहीं तक का देखेंगे, और सब दूसरे का विषय है, यह बोलकर आगे बढ़ जाएंगे?
यहाँ सबसे बड़ा राक्षस है—खुद का अहंकार (Ego); उसके बाद है—अंधाधुंध विस्तार; उसके बाद है—अपना पक्ष छोड़, दूसरों के विषय पर जबरदस्ती प्रकाश डालना; और एक और भयावह राक्षस है—हथियारों का अंधाधुंध विकास व उनकी खरीद-फरोख्त। एक और राक्षस है—अपने घर का साथ न देकर, बिना मतलब की चीजों पर व्यर्थ ध्यान देना।
इसमें उन लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जो शासन से हटकर अपनी राय रखते हैं—यह भूलकर कि राजनीति घर के मामलों में की जाती है। अगर बाहर का मामला है, तो पहले जिसे तय किया गया है बोलने के लिए, उसे बोलने दिया जाए। जब लगे कि वह फेल हो रहा है, तो पहले उसे अपना सहयोग प्रदान कीजिए; फिर भी बात न बने, तो अपनी सोच से अवगत करवाइए। और अगर फिर भी न हो पाए, तब हमला कीजिए या राजनीति कीजिए।
लेकिन यहाँ तो देश देखकर राजनीति शुरू हो गई है। दो अलग-अलग ध्रुव के देश हैं, तो एक को राक्षस बना दो और दूसरे को हीरो। और अगर दोनों एक ही हैं और खुद से संबंधित हैं, फिर चाहे कितने ही लोग उसमें फँसकर मर जाएँ, एक शब्द भी नहीं बोलना है। बस, यहीं मंशा पर सवाल उठ जाता है।"

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