छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर,
( मारोड़े पाड़ा, भिवंडी, ठाणे, महाराष्ट्र )
चित्र में जो किला दिख रहा है, वह सिर्फ एक किला नहीं है। यह महाराष्ट्र के ही नहीं अपितु पूरे भारत वर्ष के आराध्य देव और हिंदवी स्वराज के संस्थापक श्री छत्रपति शिवाजी महाराज का भव्य मंदिर है। यह महाराष्ट्र राज्य में श्री छत्रपति शिवाजी महाराज का पहला मंदिर है और पुरे भारत में दूसरा मंदिर है। आंध्रप्रदेश के श्रीशैलम में भी श्री छत्रपति शिवाजी महाराज का मंदिर है। इस मंदिर को शिवक्रांति प्रतिष्ठान संस्था के छांव में श्री राजू चौधरी जी के द्वारा बनवाया गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज क्या व्यक्तित्त्व थे? या क्यों लोग उन्हें इतना चाहते हैं? वो आप कवि कवि भूषण के द्वारा लिखी गयी इन पंक्तियों से समझ सकते हैं।
"देवल गिरावते, फिरावते निसान अली,
ऐसे समय राव राणें सब गए खुन्नत।
गौरा गणपति और गौरज की पूजा जाती,
छत्रपति सिवा न होते तो सुन्नत होती सबकी।।"
अब आप इन लाइनों से पता लगा लिए होंगे की उन्हें क्यों भगवान की तरह पूजा जाता है।
इस मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा पिछले वर्ष छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मार्च 2025 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस जी के हाथों से संपन्न हुआ था। साथ में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जी और भिवंडी के खासदार, पूर्व खासदार, और सभी आमदार एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिती दर्ज करवाई थी।
अगर आप ने सुना है और अभी तक मंदिर नहीं देखा है तो एक बार जरूर मंदिर देखे। छत्रपति शिवाजी महाराज को देखने बहाने से ही सही आप खुद का दर्शन करवाईये उस क्षेत्र को। देखना आने आप यही महसूस करेंगे की इस भव्य मंदिर के बारे में जानकारी होने के बावजूद भी न आने के बारे में सोचकर आप अपने जीवन में कितनी बड़ी गलती कर रहे थे। यह मंदिर छत्रपति शिवाजी महाराज के द्वारा किए गए उनके समय के सभी कार्यों जितना ही भव्य और सुंदर बना है। इसके आसपास का परिसर, इसे उस समय का पृष्ठभूमि देता है। वैसे मंदिर इतना सुन्दर भव्य बना है की यह सभी मौसम में सुन्दर दिखता है लेकिन वर्षा के मौसम में ये और ज्यादा भव्य दिखता है। जिस भव्यता की आप कल्पना नहीं कर सकते हैं। इसकी भव्यता में चार चाँद लगाते हैं आसपास के परिसर। एकदम खेड़े गाँव के क्षेत्र में यह मंदिर बना है। आसपास खेत, खलिहान, गाँव की सड़के सब इस भव्य मंदिर को भव्य बनाने में अपना योगदान देते हैं। आपको लगेगा जैसे आप अपने गाँव में आये हो कुछ इस तरह का अनुभव प्राप्त होता है। इसलिए कहते हैं आपको अगर इसके बारे में थोड़ी भी जानकारी मिलती है तो एक बार जरूरर भेंट दे इस मंदिर के दर्शन को। आप अपने साथ एक जीता जागता इतिहास ले जाएंगे।
मंदिर के सामने की दीवारें
मंदिर को घेरे हुए दीवारों पर छत्रपति शिवाजी महाराज से संबंधित इतिहास को इतने अच्छे से सहेजा गया है की आप उसे पढ़े बिना आगे बढ़ ही नहीं सकते हैं। साथ में उस समय या मराठा सेनानियों के द्वारा युद्ध में उपयोग होने वाले औजारों को भी दिखलाया गया है। इन सभी चीजों के बारे में मराठी और अंग्रेजी भाषा में संक्षेप में लिखा गया है ताकि क्षत्रपति शिवाजी महाराज के दर्शन के लिए आने वाले सभी आंगतुक उसे पढ़कर छत्रपति शिवाजी महाराज जी के बारे में और हिंदवी स्वराज की स्थापना में उनका साथ देने वाले सभी मावलों, मराठा सरदारों काल में उपयोग में लाये जाने वाले हथियारों के बारे में जान सकें।
सामने के एक कोने में संस्था का कार्यालय है तो दूसरे कोने में छत्रपति शिवाजी महाराज से सम्बंधित फोटो मूर्तियों का विक्रय करने का दालान हैं। वहीँ पीछे के दोनों कोनो में मराठा सैनिकों के द्वारा उपयोग में लाये जाने वाले हथियारों को प्रदर्शित किया गया है।
मंदिर की भव्यता
मंदिर के चारो तरफ किले के रूप में दीवार बनाई गयी है। जो इस मंदिर की भव्यता में और चार चाँद लगाता है। मंदिर के मुख्य दरवाजे के पास उस समय के सेना की संरचना कैसी होती थी। सेना में कौन कौन से दल होते थे उन्हें प्रतिकृति के रूप में खड़ा किया गया है। मुख्यद्वार पर ही भगवान शिव की तपस्या में लीन के रूप में बैठी हुयी एक मूर्ती स्थापित की गयी है। जो इस मंदिर को और गहराई प्रदान करता है। किले का मुख्यद्वार दरवाजा एकदम किले में लगने वाले दरवाजे के सामान ही लगाया गया है। जो किले को असली रूप देता हैं। आपको मंदिर और किले को देखकर कभी लगेगा ही नहीं की यह किला आज के युग में बनाया गया है।
किले से अंदर घुसते ही साक्षात् छत्रपति शिवाजी महाराज के भव्य मंदिर का दर्शन होता है। और उसके वास्तुशिल्प को देखते ही ठंडी सी आह के साथ वाह निकाले बिना यह दिल मानता नहीं है। देखते ही पूरा वास्तुशिल्प मन मोह लेता है। ऐसा लगता है यह पहले से ही बना था हम ही बहुत देर से आये हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज जी के दर्शन दूर से ही सही मुख्यद्वार से अंदर घुसते हो जाता है लेकिन जैसे आगे बढ़ते हुए एक एक सीढ़ी चढ़ते हुए और नजदीक से और नजदीक से देखते चले जाते हैं मूर्ति की भव्यता मन के रस्ते दिल में बसती चली जाती है। ऐसा लगता है, जैसे महाराज जी साक्षात् रूप में अपने दरबार में विराजमान हैं और हम आम जनता के रूप में अपनी अपनी समस्याएं, शिकायते उनके पास ले गए हुए हैं और वे अपने सिंहासन पर बैठकर एक रौबदार रूप में उनके दरबार में उपस्थित सभी आंगतुकों की बातें बड़े ही ध्यान से सुन रहे हैं।
महाराज की मूर्ति और गर्भगृह
उनकी मूर्ति का निर्माण महान वास्तुकार अरुण योगीराज जी ने बनाया है। इन्ही योगीराज जी ने अयोध्या मंदिर के प्रभुश्रीराम जी बाल्यावस्था की बनायी है। जिसे देखते लगता है की कोई व्यक्ति अगर सिद्दत से कोई चीज बनाये तो वो पत्थरों में भी जान डाल सकता है। उन्ही योगीराज जी ने छत्रपति शिवाजी महाराजजी के मूर्ति में भी अपने हुनर से प्राण डाल दिए हैं। एक बार मूर्ति पर नजर पड़ने के बाद आसानी से आपकी नजर हटे हटाए हटेगी नहीं। छत्रपति शिवाजी महाराज जी के चरणों के पास एक तलवार रखी गयी है। छत्रपति शिवाजी महाराज जी के मंदिर के गर्भगृह के अंदर के भाग को सोने के पानी चढ़े नक्काशी दार चित्रों से बनाया गया है। जो गर्भगृह की सुंदरता में चार चाँद लगाते हैं। गर्भगृह के बाहर एक तरफ छत्रपति शिवाजी महाराज जी की कुलदेवी तुळजा भवानी का छोटा मंदिर और साथ में शिवलिंग की स्थापना की गयी है जिसके छत्रपति शिवाजी महाराज जी अनन्य भक्त थे। दूसरी तरफ छत्रपति शिवाजी महाराज जी की माँ और उनकी पहली गुरु जीजाबाई का छोटा सा मंदिर हैं।
परकोटा
हर एक मामलों में यह मंदिर बहुत ही सुंदर व अच्छा बना है। मंदिर के परकोटे पर चढ़ने के बाद ऐसा लगता है कि ये आज का नहीं छत्रपति शिवाजी महाराज के काल में ही बनाया गया कोई किला हो। आज उसे फिर से कुछ लोगों के हिम्मत भरे प्रयास से एक नया रूप दे दिया गया है। परकोटे के ऊपर से नजारा कुछ ऐसा दिखता है की किले के पीछे एक पहाड़ी है। उस पहाड़ी की छत्र छाया में ये किला और उसके आसपास छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रजा की बस्तियां हैं। किले से लगकर धान की खेती हो रही है।
मंदिर देखने क्यों आना चाहिए ?
अगर आपके दिल में छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति थोड़ा भी कुछ भी जानने की इच्छा या वे आपके दिल में हैं तो आपको एक बार जरूर इस मंदिर में एक भेट देनी चाहिए। ये कोई जबरदस्ती वाली बात नहीं है। क्योंकि उन्होंने कभी अपने जीवन या शासन काल में किसी के साथ जबरदस्ती नही की। इसलिए तो उन्हें 'जाणता राजा' कहा जाता है। ये एक व्यवाहरिक बात है। बस एक प्रश्न क्यों वे पूजे जाते हैं ? बस आपको वो अपनी तरफ खिंच लाएंगे।
उन्होंने कभी भी सैद्धांतिक मूल्यों से समझौता नहीं किया। राजा होने पर भी वे खुद को सैद्धांतिक मूल्यों से पीछे रखा। इसलिए तो उनकी सेना में किसी को जोड़ा नहीं जाता था लोग खुद ही जुड़ जाते थे। उनके एक आदेश पर अपना प्राण भी न्योछावर करने के लिए तैयार रहते थे। ऐसे राजा के बारे में जानने के लिए एक बार जरूर छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर में भेट देनी चाहिए। यह देखना चाहिए की कैसे एक सामान्य से जागीरदार का लड़का सिर्फ राजा ही नहीं हिंदवी स्वराज की स्थापना करते हुए लोगों के दिलों में जैसे जैसे समय बीतता चला जाता है वह अपनी जगह और मजबूत करते चले जाता है। इसलिए अगर आप थोड़ा भी उन्हें जानते हैं तो एक बार जरूर छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाईये। देखना आपके अंदर उन्हें और जानने की उत्सुकता बढ़ जायेगी। खुद ब खुद उन्हें जानने के लिए निकल पड़ेंगे। कैसे एक अकेला व्यक्ति कुछ मावलों की फ़ौज बनाकर दिल्ली सल्तनत के सबसे खूंखार बादशाह से लड़ता ही नहीं है। उन्हें हराता भी है। जिसे हराने के लिए पहले अपने बड़े सरदार फिर उसके मृत्यु के उपरान्त खुद मैदान में उतरकर महाराष्ट्र में आना पड़ता है।
मंदिर तक पहुंचने के रास्ते
छत्रपति शिवाजी महाराज मंदीर तक पहुँचने के कुछ आसान रास्ते भी हैं और कुछ घुमावदार वाले भी रास्ते हैं। अब निर्भर करता है कि कौन सा रास्ता जानते हैं या आपका गूगल मैप आपको कौन सा रास्ता बतलाता है। छत्रपति शिवाजी महाराज मंदीर यह ठाणे जिले के भिवंडी तहसील के भिवंडी वाडा रोड पर मारोड़े पाड़ा गाँव में स्थित है। यह गांव भिवंडी वाडा रोड से दायीं ओर दो से दो से तीन किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।
इस मंदिर तक पहुँचने के वैसे तो दो तीन रास्ते हैं, लेकिन मुंबई से भिवंडी होकर, भिवंडी वाड़ा रोड सबसे आसान रास्ता है छत्रपति शिवाजी महाराज मंदीर तक पहुँचने का। और यही सबसे आसान रास्ता है। और सभी रास्ते मुख्य रास्ते के बाद गाँव गाँव घुमाकर बहुत ही अंदर है। अगर गाँव की सड़कों और गाँवो को देखने का शौक रखते हैं तो आपके लिए एक अडवेंचर के रूप में बहुत ही अच्छा रहेगा। साथ में आप उन रास्तों से भातसा डैम से आने वाली पाइप लाइन बीच से होकर सफर कर सकेंगे। इससे दो फायदे हो जायेंगे मंदिर दर्शन तो होंगे ही साथ ही पुरे मुम्बई को पानी सप्लाई करने वाले बड़े बड़े पाइप लाईनो को भी नजदीक से देखने का मौका मिल जाएगा।
सबसे आसान रास्ता और सबसे आसान पता यही है की भिवंडी वाडा रोड पर एक मापोली गांव पड़ता है। उस गांव से सौ से दो सौ मीटर आगे बढ़ने पर आपको भिवंडी की तरफ से दाईं ओर और वाड़ा की तरफ से अगर आ रहे हैं तो उसके बाईं ओर मुड़ना होगा। यह मोड़ वाड़ा की तरफ से आने से पहले आपको मिलेगा उसके बाद आपको मापोली गांव मिलेगा। आप वहां से किसी से पूछ सकते हैं और सीधे दो से तीन किलोमीटर पर मरोड़े गांव पड़ता है। अगर आपको फिर भी परेशानी हो रही है तो आप गूगल मैप का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। NH 3 से आते वक्त आप को बहुत से गांवों में से आना पड़ेगा। अगर गांव के रास्तों का मजा लेना है तो आप NH 3 की तरफ से आ सकते हैं नहीं तो आप सीधे भिवंडी वाडा रोड से आइए। यह रास्ता आपकी सुविधाजनक पड़ेगा।
मापोली या किसी भी रस्ते से सीधे मंदिर तक किसी भी तरह की कोई भी विशेष गाड़ी की सुविधा अभी फिलहाल में उपलब्ध नहीं है। अगर आप मंदिर आना चाहते हैं तो खुद की गाडी से ही आईये। अकेले हैं तो कुछ दूर पैदल कुछ दूर पर कोई गाड़ी वाला मिल गया तो आप सीधे मंदिर तक उससे सहायता लेकर पहुँच सकते हैं। ज्यादातर लोग क्या गाँव के लोग हैं तो वो जरूर मदत कर देते हैं। क्योंकि मुख्य सड़क से गाँव दूर होने के दर्द को वो भलीभांति जानते भीं और समझते भी हैं।
लेकिन परिवार लेकर ये रिस्क जबतक कोई सुविधा सीधे तौर पर उपलब्ध नहीं होती है तबतलक न उठाये तो आपके लिए अच्छा है। इससे आप किसी भी तरह की होने वाली असुविधा से बच जाएंगे। जैसे जैसे लोगो की मंदिर दर्शन आने के लिए भीड़ बढ़ेगी वैसे वैसे सुविधाएं भी बढ़ेगी। लेकिन मेरे मतानुसार जितनी कम सुविधाएँ रहेगी मंदिर उतना ही पुरातन और अन्य मंदिरों से अलग लगेगा भी और दिखेगा भी। जैसा हमने आपको बतलाया की परकोटा से देखने के बाद ऐसा लगता है की ये किला है और किले के आसपास आम जन की बस्तियां हैं। गाँव के पुराने घर इसे एक अलग रूप देते हैं।
।।जय शिवराया।।
–अजय नायक ‘वशिष्ठ’








Excellent sir
ReplyDeleteWhat a great person Shree Chatrpati Shivaji Maharaj